बुधवार 15 जुलाई 2026 - 13:58
जीत केवल सब्र और दृढ़ता से ही मिलेगी

हौज़ा / हरम ए हज़रत मासूमा (स.अ.) के वक्ता हुज्जतुल इस्लाम मुहम्मद साफ़ी ने कहा कि अल्लाह सब्र करने वालों से प्रेम करता है और विजय केवल सब्र, धैर्य और अडिगता के माध्यम से ही प्राप्त होती है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हरम ए हज़रत मासूमा (स.अ.) के वक्ता हुज्जतुल इस्लाम मुहम्मद साफ़ी ने कहा कि अल्लाह सब्र करने वालों से प्रेम करता है और विजय केवल सब्र, धैर्य और अडिगता के माध्यम से ही प्राप्त होती है।

उन्होंने कहा कि मोमिनों को नबियों और उनके साथियों के मार्ग पर चलना चाहिए तथा आज के अन्यायपूर्ण और थोपे गए युद्ध में अपने इमाम और अपने दीन का साथ देना चाहिए। उन्हें कभी भी दुश्मन के सामने कमज़ोरी, निराशा या गिड़गिड़ाहट नहीं दिखानी चाहिए।

उन्होंने हज़रत मासूमा (स.अ.) के पवित्र हरम में आयोजित क़ुरआन-व्याख्यान के दौरान कहा कि सूरह आले-इमरान का बड़ा भाग ग़ज़वा-ए-उहुद से संबंधित है। लगभग 60 आयतें इस युद्ध का वर्णन करती हैं, जो इस घटना के महत्व को दर्शाती हैं।

उन्होंने कहा कि उहुद के युद्ध में कुछ मुसलमानों ने पैग़म्बर मुहम्मद (स.) के आदेश की अवज्ञा की, जिसके कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा और वे विजय से लगभग वंचित हो गए। लेकिन अल्लाह की कृपा से अंततः उन्हें सफलता मिली।

प्रत्येक व्यक्ति की मृत्यु का समय पहले से निर्धारित है, इसलिए मौत का भय इंसान को सत्य की रक्षा और जिहाद से पीछे नहीं हटाना चाहिए।

अल्लाह का नियम है कि जो व्यक्ति दुनिया के लिए प्रयास करता है, उसे उसके साधन मिलते हैं, और जो आख़िरत चाहता है, अल्लाह उसे आख़िरत का प्रतिफल प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि विरोधी भी सैन्य शक्ति, तकनीक और युद्धक रणनीतियों में निरंतर मेहनत करके आगे बढ़े हैं। इसलिए सफलता केवल सत्य के पक्ष के लिए नहीं, बल्कि मेहनत करने वाले हर व्यक्ति के लिए अल्लाह के बनाए हुए नियम के अनुसार मिलती है।उन्होंने कहा,अल्लाह सब्र करने वालों को पसंद करता है और जीत केवल सब्र और दृढ़ता से ही प्राप्त होती है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए सभी ईमान वालों से आह्वान किया कि वे नबियों और उनके साथियों के मार्ग का अनुसरण करें, अपने इमाम और अपने दीन की सहायता करें तथा हर परिस्थिति में धैर्य और दृढ़ता बनाए रखें और दुश्मन के सामने कभी कमज़ोरी या निराशा का प्रदर्शन न करें।

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